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Updated 17 September 2026 · Arya Samaj Mandir Court Marriage Delhi NCR

आर्य समाज विवाह प्रमाण पत्र: वैधता, दस्तावेज़ और रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी

आर्य समाज में हुई शादी कानूनी तौर पर पूरी तरह वैध है — हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 7 के मुताबिक सप्तपदी के सातवें पग पर ही विवाह पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है। दिक्कत कहीं और है: मंदिर का प्रमाण पत्र एक निजी संस्था का रिकॉर्ड है, सरकारी दस्तावेज़ नहीं — और पासपोर्ट ऑफ़िस से लेकर बैंक तक हर जगह सरकारी वाला माँगा जाता है। इस पन्ने पर वो सब है जो कानून वाकई कहता है, जुलाई 2024 के हाईकोर्ट फ़ैसले का असली मतलब, शादी के दिन एक शाम में क्या सँभालना है, और दिल्ली में रजिस्ट्रेशन का पूरा तरीका — 60 दिन के उस नियम समेत जो लगभग कोई नहीं जानता।

Quick answer

क्या आर्य समाज विवाह प्रमाण पत्र कानूनी रूप से मान्य है?

आर्य समाज में हुआ विवाह पूरी तरह वैध है — यह हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 के तहत होने वाला विवाह है और धारा 7 के अनुसार, जहाँ रीतियों में सप्तपदी शामिल है, सातवाँ पग उठते ही विवाह पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है। लेकिन मंदिर का दिया प्रमाण पत्र एक निजी संस्था का रिकॉर्ड है, सरकारी दस्तावेज़ नहीं — पासपोर्ट ऑफ़िस, एम्बेसी, बैंक, बीमा कंपनी और पेंशन दफ़्तर सरकारी विवाह प्रमाण पत्र माँगते हैं, जो SDM या रजिस्ट्रार ऑफ़ मैरिजेज़ से मिलता है। दिल्ली (अनिवार्य विवाह पंजीकरण) आदेश 2014 के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है और आवेदन अंतिम समारोह के 60 दिन के भीतर देना होता है; रजिस्ट्रेशन शुल्क ₹200, देर से करने पर ₹500 अतिरिक्त, और न कराने पर ₹1,000 जुर्माना जिसे ADM उचित कारण पर माफ़ कर सकते हैं। धारा 8(5) के अनुसार रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह की वैधता किसी भी तरह प्रभावित नहीं होती।

Key facts at a glance
क्या आर्य समाज विवाह वैध है?हाँ — हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 के तहत वैध विवाह
विवाह कब पूर्ण होता है?सप्तपदी के सातवें पग पर — धारा 7
क्या मंदिर का सर्टिफ़िकेट सरकारी है?नहीं। निजी संस्था का रिकॉर्ड — सबूत है, प्रमाण नहीं
फिर कौन सा कागज़ चाहिए?SDM / रजिस्ट्रार से मिलने वाला सरकारी विवाह प्रमाण पत्र
रजिस्ट्रेशन न कराएँ तो?विवाह फिर भी वैध — धारा 8(5)। पर साबित करना मुश्किल
दिल्ली में समय सीमा60 दिन, अंतिम समारोह वाले दिन को छोड़कर — 2014 आदेश
रजिस्ट्रेशन शुल्क₹200; देर से ₹500 अतिरिक्त; न कराने पर ₹1,000 जुर्माना (ADM माफ़ कर सकते हैं)
तत्काल₹10,000 अतिरिक्त — वैकल्पिक, पूरी फ़ाइल हो तो ज़रूरत नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट, 5 जुलाई 2024मंदिर और रजिस्ट्रार दोनों का सर्टिफ़िकेट अकेला प्रमाण नहीं
इसलिए सबसे ज़रूरीसमारोह का सबूत — फ़ोटो, सप्तपदी की क्लिप, पंडित जी और गवाहों के ब्यौरे
उम्रलड़की 18, लड़का 21 — कोई अपवाद नहीं
गोत्रहिन्दू मैरिज एक्ट में कहीं नहीं है
कहाँ जाएँSDM / रजिस्ट्रार का दफ़्तर — किसी कोर्ट में नहीं। 1 जनवरी 2026 से 13 ज़िले, 39 सब-डिवीज़न
कॉल या व्हाट्सएप+91 7011476967

Last updated: 17 September 2026

रजिस्ट्रेशन कराना है?मंदिर का सर्टिफ़िकेट और दोनों के ID व्हाट्सएप पर भेजिए। दफ़्तर जाने से पहले ही बता देंगे कि क्या कमी है।

आर्य समाज विवाह पर हिन्दी में जो कुछ लिखा मिलता है वो या तो अधूरा है या डराने वाला। कहीं लिखा है कि मंदिर का सर्टिफ़िकेट ही काफ़ी है, कहीं ये कि सुप्रीम कोर्ट ने आर्य समाज की शादियाँ अवैध कर दीं। दोनों गलत हैं, और दोनों गलतियाँ महँगी पड़ती हैं।

इसलिए इस पन्ने पर सिर्फ़ वो बातें हैं जिन्हें आप ख़ुद जाँच सकते हैं — धाराओं के नंबर के साथ। कौन सा कानून लागू होता है, विवाह किस पल पूरा होता है, कौन सा कागज़ क्या काम करता है, जुलाई 2024 के फ़ैसले ने असल में क्या कहा, और उससे निकलने वाला एक शाम का काम जो आपकी शादी को सालों तक साबित करने लायक बना देता है। आख़िर में दिल्ली में रजिस्ट्रेशन का पूरा तरीका, असली सरकारी फ़ीस के साथ।

1. सबसे पहले वो बात जो सबसे ज़्यादा गलत बताई जाती है

आर्य समाज में हुई शादी कानूनी तौर पर पूरी तरह वैध है। इस बात पर कोई सवाल नहीं। दिक्कत कहीं और है — और वो दिक्कत हर हफ़्ते किसी न किसी के साथ होती है, पासपोर्ट ऑफ़िस में, एम्बेसी में, बैंक में या अस्पताल में।

तीन बातें, और बाकी पूरा पन्ना इन्हीं से निकलता है। एक: आर्य समाज का विवाह हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 के तहत होने वाला विवाह है, और धारा 7 के मुताबिक जहाँ सप्तपदी होती है वहाँ सातवें फेरे पर विवाह पूरा और बाध्यकारी हो जाता है। दो: मंदिर का दिया हुआ प्रमाण पत्र एक निजी संस्था का रिकॉर्ड है — वो सरकारी दस्तावेज़ नहीं है। तीन: जो कागज़ हर दफ़्तर माँगता है, वो SDM / रजिस्ट्रार ऑफ़ मैरिजेज़ से मिलने वाला सरकारी विवाह प्रमाण पत्र है।
यानी आपको दोनों चाहिए। मंदिर का प्रमाण पत्र सँभाल कर रखिए — वो सबूत है। लेकिन रजिस्ट्रेशन भी कराइए, क्योंकि वीज़ा अफ़सर, बैंक, बीमा कंपनी, कंपनी का HR और पेंशन दफ़्तर — कोई भी मंदिर का कागज़ अकेले स्वीकार नहीं करता। और दिल्ली में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य भी है, जिसकी बात धारा 6 में है।

और एक बात जो 2024 के बाद और ज़रूरी हो गई है: हिन्दू मैरिज एक्ट वाले रास्ते में असली ताक़त सर्टिफ़िकेट में नहीं, समारोह के सबूत में है। ये क्यों, और आपको शादी के दिन क्या-क्या सँभालना है — धारा 4 और 5 में पूरा लिखा है।

मुफ़्त दस्तावेज़ जाँच, कोई शुल्क नहींनाम की स्पेलिंग और जन्म तिथि का फ़र्क़ ही असल में महीना खाता है। दस मिनट में पकड़ लेते हैं।

2. कानून क्या कहता है — धारा दर धारा

हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, धारा 2 — किन पर लागू होता है

ये एक्ट हिन्दुओं पर, और साफ़ शब्दों में बौद्ध, जैन और सिख पर भी लागू होता है। यानी एक सिख और एक जैन, या एक हिन्दू और एक बौद्ध — दोनों इसी एक्ट के अंदर हैं। जाति का इससे कोई लेना-देना नहीं।

धारा 5 — शर्तें

  • किसी का जीवित जीवनसाथी न हो।
  • दोनों सहमति देने में सक्षम हों।
  • लड़की की उम्र 18 साल और लड़के की 21 साल पूरी हो। इसमें कोई छूट नहीं, कोई रिवाज़ नहीं, कोई अपवाद नहीं।
  • दोनों निषिद्ध सम्बन्ध (prohibited degrees) में न हों और सपिण्ड न हों — जब तक कि दोनों पर लागू रिवाज़ इसकी इजाज़त न देता हो।

धारा 7 — विवाह कब पूरा होता है

धारा 7: हिन्दू विवाह किसी भी पक्ष के प्रथागत संस्कारों और रीति-रिवाजों के अनुसार सम्पन्न किया जा सकता है। और जहाँ उन रीतियों में सप्तपदी शामिल है — अग्नि के समक्ष वर-वधू द्वारा मिलकर सात पग लेना — वहाँ सातवाँ पग उठते ही विवाह पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है।

इस एक वाक्य को ध्यान से पढ़िए। इसका मतलब है कि आप अग्नि के सामने सातवें फेरे पर विवाहित हो जाते हैं — किसी फ़ॉर्म भरने पर नहीं, किसी सर्टिफ़िकेट छपने पर नहीं, किसी बाबू की मुहर लगने पर नहीं।

धारा 8 — रजिस्ट्रेशन, और उसकी असली हैसियत

  • धारा 8(2): राज्य सरकार रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बना सकती है, और उल्लंघन पर जुर्माना — पच्चीस रुपये तक। जी हाँ, पच्चीस। एक्ट में पूरा दंड इतना ही है।
  • धारा 8(4): हिन्दू मैरिज रजिस्टर निरीक्षण के लिए खुला रहेगा और उसमें दर्ज बातों के साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य (admissible as evidence) होगा। ध्यान दीजिए — स्वीकार्य, न कि निर्णायक प्रमाण।
  • धारा 8(5): “किसी हिन्दू विवाह की वैधता प्रविष्टि न किए जाने से किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगी।”
इसीलिए तीस साल पुरानी बिना रजिस्ट्रेशन वाली शादी भी कानून की नज़र में पूरी तरह वैध है। और इसीलिए — ये दूसरा हिस्सा लोग नहीं समझते — आपका सर्टिफ़िकेट वो काम नहीं करता जो आप समझते हैं। धारा 4 इसी पर है।

आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट 1937

एक छोटा-सा पुराना कानून, जो ख़ास वजह से बनाया गया था: वो आर्य समाजियों के बीच हुए विवाहों को वैध ठहराता है, चाहे पक्ष अलग-अलग जातियों के हों, या उनमें से किसी ने कभी कोई दूसरा धर्म माना हो। यही वजह है कि आर्य समाज में हुआ अंतरजातीय विवाह कभी कानूनी रूप से संदिग्ध नहीं रहा।

शादी को साल हो गए, रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ?आपकी शादी वैध है — धारा 8(5)। तारीख़ और जगह बताइए, हम बताएँगे कि अब भी क्या-क्या सबूत मिल सकते हैं।

3. चार अलग-अलग कागज़, जिन्हें लोग एक समझ लेते हैं

चार कागज़, चार अलग-अलग कानूनी वज़न
कागज़कौन देता हैकानूनी हैसियत
आर्य समाज विवाह प्रमाण पत्रमंदिर या उसकी सभाएक निजी संस्था का रिकॉर्ड कि वहाँ समारोह हुआ। सबूत है, प्रमाण नहीं। सरकारी दस्तावेज़ नहीं। पासपोर्ट ऑफ़िस, एम्बेसी, बैंक या कोर्ट अकेले इसे स्वीकार नहीं करते
सरकारी विवाह प्रमाण पत्र (HMA)SDM / रजिस्ट्रार ऑफ़ मैरिजेज़रजिस्टर की प्रविष्टि का सरकारी रिकॉर्ड। धारा 8(4) — साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य। यही वो कागज़ है जो हर दफ़्तर माँगता है
विवाह प्रमाण पत्र (स्पेशल मैरिज एक्ट)मैरिज ऑफ़िसरधारा 13(2) — निर्णायक प्रमाण (conclusive evidence) कि विवाह सम्पन्न हुआ। चारों में सबसे मज़बूत, कानून से
हलफ़नामे, फ़ोटो, पंडित जी का पत्रआप, नोटरी, पुरोहितसहायक सबूत। अकेले बेकार, मिलकर निर्णायक — और यही धारा 5 का पूरा मुद्दा है
सबसे बड़ी गलतफ़हमी: “मंदिर का सर्टिफ़िकेट है, अब रजिस्ट्रेशन की क्या ज़रूरत?” — ये सोच सबसे महँगी पड़ती है। जिस दिन वीज़ा, बैंक, बीमा या पेंशन का काम पड़ता है, उसी दिन पता चलता है कि जो कागज़ चाहिए वो कभी बनवाया ही नहीं गया — और तब तक गवाह बिखर चुके होते हैं।
शादी अभी होनी है?एक बार बात कर लीजिए — उस दिन क्या-क्या सँभालना है, ये बाद में नहीं मिलता। सलाह मुफ़्त है।

4. इलाहाबाद हाईकोर्ट, 5 जुलाई 2024 — और उसका असली मतलब

पिछले कुछ साल से एक ख़बर बार-बार घूमती है: “सुप्रीम कोर्ट ने आर्य समाज के विवाह अवैध घोषित कर दिए।” ये ख़बर गलत है। असली फ़ैसला ये है, और ये आपके लिए बहुत काम का है।

श्रुति अग्निहोत्री बनाम आनंद कुमार श्रीवास्तव, 2024 SCC OnLine All 3701 — इलाहाबाद हाईकोर्ट, 5 जुलाई 2024, न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला। कोर्ट ने कहा कि आर्य समाज संस्था द्वारा और मैरिज रजिस्ट्रार द्वारा जारी प्रमाण पत्र, अपने आप में, किसी वैध हिन्दू विवाह का प्रमाण नहीं हैं, जब तक ये साबित न हो कि धारा 7 के अनुसार प्रथागत संस्कार और रीति-रिवाज वाकई सम्पन्न हुए थे। कोर्ट के शब्दों में — “ऐसे प्रमाण पत्रों का कोई अर्थ नहीं है जब तक वैध हिन्दू विवाह की पूर्व-शर्तें पूरी और सिद्ध न हो जाएँ।” कोर्ट ने ये भी नोट किया कि उसके सामने रखे प्रमाण पत्र में सप्तपदी का कोई ज़िक्र नहीं था।

अब ध्यान से देखिए कि इस फ़ैसले ने क्या कहा और क्या नहीं

  • इसने ये नहीं कहा कि आर्य समाज के विवाह अवैध हैं। सही तरीक़े से, पात्र लोगों के बीच हुआ आर्य समाज विवाह पूरी तरह वैध हिन्दू विवाह है और हमेशा रहा है।
  • इसने सिर्फ़ आर्य समाज को निशाना नहीं बनाया। कोर्ट ने रजिस्ट्रार के सर्टिफ़िकेट को भी ठीक उसी स्थिति में रखा। ये मंदिर की समस्या नहीं है — ये हिन्दू मैरिज एक्ट की बनावट है।
  • इसने ये कहा कि कागज़ उस समारोह को पैदा नहीं कर सकता जो हुआ ही नहीं — और जब समारोह पर सवाल उठे, तो आपको साबित करना होगा कि वो हुआ था।
आपके लिए इसका सीधा मतलब। हिन्दू मैरिज एक्ट वाले रास्ते में आपका सर्टिफ़िकेट आपका सबसे मज़बूत कागज़ नहीं है। सबसे मज़बूत चीज़ है — ये सबूत कि समारोह हुआ था। और लगभग हर जोड़ा सर्टिफ़िकेट फ़ाइल में रख लेता है, फ़ोटो फेंक देता है, गवाहों से संपर्क टूट जाता है, और पंडित जी का नाम कभी लिखा ही नहीं जाता। अगली धारा में ठीक यही एक शाम का काम है।
किसी ने पुरानी तारीख़ का सर्टिफ़िकेट ऑफ़र किया?मत लीजिए। बताइए क्या कहा गया, और हम बताएँगे कि असल में आपके मामले में क्या मुमकिन है।

5. शादी के दिन क्या-क्या सँभालना है — एक शाम का काम

अगर इस पूरे पन्ने में से सिर्फ़ एक हिस्सा रखना हो, तो ये रखिए। इसमें पैसा नहीं लगता, एक शाम लगती है, और ये फ़र्क़ है एक ऐसे सर्टिफ़िकेट में जो बहस ख़त्म कर देता है और एक ऐसे में जो बहस शुरू करता है।

क्या रखें, और वो क्या साबित करता है
रखेंक्यों ज़रूरी है
हवन और फेरों की फ़ोटो — सिर्फ़ पोज़ वाली नहींकोर्ट ने देखा था कि रीति-रिवाज हुए या नहीं। एक चौड़ी फ़ोटो जिसमें आप दोनों अग्नि के चारों ओर हैं और पंडित जी दिख रहे हैं — वो बीस पोर्ट्रेट से ज़्यादा काम आती है
सप्तपदी की छोटी वीडियो क्लिप, फ़ोन से ही सहीधारा 7 सात पगों का नाम लेती है। तीस सेकंड की वीडियो ठीक उसी बात का सीधा सबूत है जो कानून में लिखी है
पंडित जी / आचार्य जी का पूरा नाम, पता और फ़ोन नंबरवही एक गवाह हैं जो बता सकते हैं कि रीति कैसे हुई। लोग ये कभी नहीं लिखते और दस साल बाद ढूँढ नहीं पाते
दोनों गवाहों के नाम, पते, नंबर और ID की कॉपीगवाह जगह बदलते हैं, नंबर बदलते हैं। रजिस्टर पर दस्तख़त बेकार हैं अगर आदमी मिले ही नहीं
मंदिर का सर्टिफ़िकेट + रजिस्टर एंट्री नंबर और तारीख़अकेला प्रमाण नहीं — पर ये समारोह को एक ऐसी संस्था से जोड़ता है जो रिकॉर्ड रखती है, और एंट्री ढूँढी जा सकती है
निमंत्रण पत्र, बुकिंग रसीद, हॉल या खाने का बिल, पंडित जी की रसीदतीसरे पक्ष द्वारा अपने काम के लिए उसी वक़्त बनाए गए कागज़ सबसे भरोसेमंद सबूत होते हैं — ठीक इसलिए कि वो किसी कोर्ट के लिए नहीं बनाए गए
सरकारी विवाह प्रमाण पत्र, और दो अतिरिक्त प्रमाणित प्रतियाँकाउंटर पर ही मँगवा लीजिए। बाद में लेना अलग चक्कर है
आज लिखा हुआ एक पन्ना — तारीख़, जगह, कौन-कौन था, क्या-क्या हुआजब याद है तब लिखा हुआ। कानूनी दस्तावेज़ नहीं, पर सालों बाद याददाश्त से दिन जोड़ना नहीं पड़ेगा
और एक छोटी-सी बात जो माँग लेनी चाहिए: सर्टिफ़िकेट में सम्पन्न हुए संस्कारों का ज़िक्र हो। हाईकोर्ट ने ख़ास तौर पर नोट किया था कि उसके सामने वाले सर्टिफ़िकेट में सप्तपदी का ज़िक्र नहीं था। उस वक़्त माँगना आसान है; बाद में जोड़ना नामुमकिन।

सब कुछ स्कैन कीजिए, एक कॉपी ऑफ़लाइन रखिए और एक ऐसे अकाउंट में जहाँ पति और पत्नी दोनों अलग-अलग पहुँच सकें। ये आख़िरी बात मामूली नहीं है — जिन हालात में ये फ़ाइल चाहिए होती है, अक्सर उन्हीं हालात में एक जने की घर तक पहुँच नहीं होती।

फ़ीस लिखित में, दो अलग लाइनों में चाहिए?सरकारी शुल्क और सर्विस फ़ीस अलग-अलग, व्हाट्सएप पर, पैसे देने से पहले।

6. रजिस्ट्रेशन कैसे कराएँ — दिल्ली में, कदम दर कदम

कहाँ जाना है

SDM / रजिस्ट्रार ऑफ़ मैरिजेज़ के दफ़्तर — जो दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग का अधिकारी होता है।

किसी भी कोर्ट में शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं होता। तीस हज़ारी, साकेत, रोहिणी, कड़कड़डूमा, द्वारका — इनमें से किसी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में विवाह रजिस्टर नहीं रखा जाता। “कोर्ट मैरिज” सिर्फ़ बोलचाल का शब्द है।

राजस्व विभाग के अपने पन्ने कहते हैं कि आप अपने इलाके के ADM के दफ़्तर या सम्बन्धित डिप्टी कमिश्नर के दफ़्तर जा सकते हैं। काउंटर का समय एक पन्ने पर सुबह 10 से दोपहर 1 बजे और दूसरे पर सुबह 9:30 से 1 बजे दिया गया है — दोनों हाल में ये सुबह का काम है, दोपहर बाद जाने से कुछ नहीं होता।

जाने से पहले फ़ोन करके सब-डिवीज़न पक्का कर लीजिए। 1 जनवरी 2026 से दिल्ली में 13 राजस्व ज़िले और 39 सब-डिवीज़न हैं (कैबिनेट का फ़ैसला 11 दिसम्बर 2025) — पुरानी दिल्ली, सेंट्रल नॉर्थ और आउटर नॉर्थ बने, और शाहदरा ख़त्म हुआ। जो पता 2025 में एक दफ़्तर में जाता था, आज वहाँ न जाता हो। आजकल दिल्ली में सबसे ज़्यादा बर्बाद होने वाली सुबह यही है।

60 दिन का नियम — जो लगभग कोई नहीं जानता

दिल्ली (अनिवार्य विवाह पंजीकरण) आदेश, 2014 दिल्ली में हुए हर विवाह पर लागू होता है — जाति, पंथ या धर्म चाहे जो हो — बशर्ते कम से कम एक पक्ष भारतीय नागरिक हो, पुरुष 21 या उससे ऊपर और महिला 18 या उससे ऊपर। इसके तहत:

• आवेदन 60 दिन के अंदर देना है, अंतिम विवाह समारोह वाले दिन को छोड़कर।
• रजिस्ट्रेशन फ़ीस ₹200।
• बढ़ी हुई अवधि में देर से रजिस्ट्रेशन पर ₹500 अतिरिक्त।
• तत्काल यानी प्राथमिकता पर ₹10,000 अतिरिक्त — वैकल्पिक, और पूरी फ़ाइल हो तो आम तौर पर ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
• तय या बढ़ी हुई अवधि में रजिस्ट्रेशन न कराने पर ₹1,000 जुर्माना, जिसे अपर ज़िला मजिस्ट्रेट (ADM) उचित कारण दिखाने पर माफ़ कर सकते हैं।

अगर आप शादी के दो महीने बाद ये पढ़ रहे हैं और घबरा रहे हैं — देर हुई है, पर रास्ता बंद नहीं है। देर से किया रजिस्ट्रेशन भी रजिस्ट्रेशन है, जुर्माना मामूली है और माफ़ भी हो सकता है, और आपकी शादी पूरे समय वैध थी (धारा 8(5))। इस महीने चले जाइए, अगले साल नहीं।

क्या-क्या ले जाना है

दिल्ली में आर्य समाज विवाह के रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़
दस्तावेज़ध्यान रखने की बात
आर्य समाज मंदिर का प्रमाण पत्र, असलीमुहर और दस्तख़त के साथ, और उस पर रजिस्टर एंट्री नंबर ज़रूर लिखवाइए — यही वो चीज़ है जो सबसे ज़्यादा छूटती है और सबसे ज़्यादा काम आती है
पंडित जी / आचार्य जी का प्रमाण पत्रराजस्व विभाग की अपनी सूची में धार्मिक स्थल पर हुए विवाह के लिए पुरोहित के प्रमाण पत्र का ज़िक्र है
उम्र का प्रमाण — दोनों कादसवीं की मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट
पहचान पत्र — दोनों काआधार, पासपोर्ट, वोटर ID, ड्राइविंग लाइसेंस
पते का प्रमाणकई ज़िला दफ़्तर शादी से पहले और बाद दोनों का पता माँगते हैं
फ़ोटोदोनों की पासपोर्ट साइज़, और समारोह की फ़ोटो। ज़्यादा ले जाइए
अलग-अलग हलफ़नामे — हर पक्ष का एकदिल्ली में अलग-अलग हलफ़नामे चाहिए, एक साझा हलफ़नामा नहीं। छोटे मूल्य के स्टाम्प पेपर पर, नोटरी के सामने
दो गवाह, असली ID और पते के प्रमाण के साथबेहतर हो कि वही गवाह हों जो समारोह में थे — इससे पूरी फ़ाइल एक सी बैठती है
तलाक़ की डिक्री या मृत्यु प्रमाण पत्र, अगर पहले शादी हुई होप्रमाणित प्रति, और ये दिखाने वाला कागज़ कि अपील की अवधि बीत चुकी है
वीज़ा या एम्बेसी के लिए चाहिए?देश और तारीख़ बताइए। कितनी कॉपी और अपोस्टिल — ये फ़ाइल लगाने से पहले तय होता है, बाद में नहीं।

7. खर्चा — सरकारी और सर्विस, दो अलग लाइनें

सरकारी तरफ़

  • ₹200 — 2014 आदेश के तहत रजिस्ट्रेशन, जैसा प्रकाशित है।
  • ₹150 — सोलेमनाइज़ेशन के लिए, राजस्व विभाग के एक पन्ने पर। दूसरे पन्ने पर हिन्दू मैरिज एक्ट के लिए ₹100 लिखा है।
  • ₹500 अतिरिक्त — बढ़ी हुई अवधि में देर से रजिस्ट्रेशन पर।
  • ₹50 प्रति दस्तावेज़ — MEA अपोस्टिल, अगर सर्टिफ़िकेट विदेश में इस्तेमाल होना है।
  • स्टाम्प पेपर और नोटरी — हलफ़नामों के लिए, कुछ दसियों रुपये और नोटरी की फ़ीस।
ध्यान दीजिए: तत्काल वाले ₹10,000 को छोड़ दें, तो यहाँ हर सरकारी आँकड़ा सैकड़ों में है — हज़ारों में नहीं। इसके अलावा आप जो भी दे रहे हैं वो किसी की सर्विस फ़ीस है, और उसे अलग लाइन में लिखा होना चाहिए।

सर्विस की तरफ़

एक ईमानदार सर्विस जिस काम का पैसा लेती है वो असली होता है: पहले ही बता देना कि कौन सा रास्ता लागू होगा, नाम और जन्म तिथि की गड़बड़ियाँ पकड़ना जो वरना एक महीना खा जातीं, ऐसे हलफ़नामे बनाना जो वापस न हों, ऐसी फ़ाइल जोड़ना जो काउंटर पर टिके, समारोह की व्यवस्था और अपॉइंटमेंट सँभालना। हमारी सहायता प्राप्त रजिस्ट्रेशन ₹6,100 से शुरू होती है, और सरकारी शुल्क तथा सर्विस फ़ीस लिखित में, दो अलग लाइनों में, पैसे देने से पहले।

मुफ़्त दस्तावेज़ जाँच, कोई शुल्क नहींनाम की स्पेलिंग और जन्म तिथि का फ़र्क़ ही असल में महीना खाता है। दस मिनट में पकड़ लेते हैं।

8. यहाँ धोखा होता है — सात निशानियाँ

जो कहा जाता है, और सच
दावासच
“मंदिर का सर्टिफ़िकेट काफ़ी है, रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं।”गलत। वो निजी रिकॉर्ड है। पासपोर्ट, एम्बेसी, बैंक, बीमा, पेंशन — सब सरकारी सर्टिफ़िकेट माँगते हैं। और दिल्ली में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है
“सर्टिफ़िकेट शादी की पुरानी तारीख़ में बनवा देंगे।”ये कानूनी रूप से हो ही नहीं सकता, और झूठी तारीख़ वाला कागज़ बिना कागज़ के भी बुरा है — ठीक उस वक़्त आपकी बाकी सारी फ़ाइल की विश्वसनीयता ख़त्म कर देता है जब कोई जाँच रहा होता है। हम ये साफ़ मना करते हैं
“3 घंटे में शादी, गारंटी।”या तो वो हिन्दू मैरिज एक्ट वाले आम रास्ते को नाटकीय भाषा में बेच रहे हैं — जो हर पात्र जोड़े के लिए वैसे भी खुला है — या कुछ ऐसा वादा कर रहे हैं जो कानूनन पूरा नहीं हो सकता। पूछिए: किस एक्ट के तहत?
“30 दिन का नोटिस हम हटवा देंगे।”कोई नहीं हटवा सकता। ये स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 5 और 6 है। अगर आप हिन्दू मैरिज एक्ट वाले रास्ते के हक़दार हैं तो वो अलग कानून है, छूट नहीं — और वो सलाह मुफ़्त है
“पूरा पैकेज ₹35,000, हिसाब मत पूछिए।”दो लाइनें माँगिए — सरकारी शुल्क और सर्विस फ़ीस। हिसाब अलग करने से इनकार इस पूरे धंधे की सबसे साफ़ चेतावनी है
“जाति अलग है तो सर्टिफ़िकेट चाहिए / इजाज़त चाहिए।”गलत। जाति किसी एक्ट की शर्त नहीं है, कोई जाति प्रमाण पत्र नहीं चाहिए, और आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट 1937 ने तो ये सवाल ही ख़त्म कर दिया था
“गोत्र एक है तो शादी नहीं हो सकती।”गोत्र हिन्दू मैरिज एक्ट में कहीं नहीं है। एक्ट सपिण्ड सम्बन्ध और निषिद्ध सम्बन्धों को रोकता है — गोत्र को नहीं
और असली पैसे देने से पहले एक काम कीजिए। अपने असली दस्तावेज़ किसी को मत दीजिए जब तक लिखित में दो लाइनों वाला कोटेशन हाथ में न आ जाए। कोटेशन का बढ़ जाना तभी होता है जब कागज़ उनके पास हों।
शादी को साल हो गए, रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ?आपकी शादी वैध है — धारा 8(5)। तारीख़ और जगह बताइए, हम बताएँगे कि अब भी क्या-क्या सबूत मिल सकते हैं।

9. हम क्या नहीं करते

  • कम उम्र की फ़ाइलें हम नहीं लेते। लड़की 18 और लड़का 21 पूरे। कोई अपवाद नहीं, कोई रिवाज़ नहीं, कोई छूट नहीं — और ये हर फ़ाइल में सबसे पहले जाँचा जाता है।
  • पुरानी तारीख़ वाले सर्टिफ़िकेट नहीं, और झूठी तारीख़, जगह या तथ्य वाला कोई कागज़ नहीं।
  • नोटिस से बचने के लिए धर्म परिवर्तन की व्यवस्था नहीं। किसी भी क़ीमत पर नहीं — और NCR के ज़्यादातर हिस्से में वो रास्ता उल्टा लम्बा है।
  • दहेज से जुड़ा कुछ भी नहीं। दहेज माँगना, देना या लेना दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के तहत अपराध है।
  • मुक़दमेबाज़ी नहीं। कोर्ट में पेशी नहीं, प्रोटेक्शन पिटीशन नहीं, पुलिस शिकायत का जवाब नहीं। अगर धमकी मिली हो या शिकायत दर्ज हुई हो तो उसी काम के लिए वकील कीजिए — तुरंत। हम पहली ही कॉल पर यही कहेंगे।
  • और अक्सर हम ये भी कहते हैं कि आपको हमारी ज़रूरत ही नहीं है। अगर दोनों पात्र हैं, कागज़ साफ़ हैं और नाम मिलते हैं, तो रजिस्ट्रेशन एक फ़ॉर्म, एक फ़ीस और एक सुबह का काम है। ये कह देना हमें काम से महरूम करता है, फिर भी हम कहते हैं।
शादी अभी होनी है?एक बार बात कर लीजिए — उस दिन क्या-क्या सँभालना है, ये बाद में नहीं मिलता। सलाह मुफ़्त है।

10. Frequently asked questions

20 questions we are asked most often, answered directly.

क्या आर्य समाज में हुई शादी कानूनी रूप से वैध है?

हाँ, पूरी तरह। यह हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 के तहत होने वाला विवाह है। धारा 7 के अनुसार जहाँ रीतियों में सप्तपदी शामिल है, वहाँ सातवाँ पग उठते ही विवाह पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है। इसके अलावा आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट 1937 आर्य समाजियों के बीच हुए विवाहों को अलग-अलग जातियों के बावजूद वैध ठहराता है।

तो फिर रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी है?

क्योंकि वैध होना और साबित कर पाना दो अलग बातें हैं। मंदिर का प्रमाण पत्र एक निजी संस्था का रिकॉर्ड है, सरकारी दस्तावेज़ नहीं। पासपोर्ट ऑफ़िस, एम्बेसी, बैंक, बीमा कंपनी, कंपनी और पेंशन दफ़्तर — सब सरकारी विवाह प्रमाण पत्र माँगते हैं। और दिल्ली में 2014 आदेश के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य भी है।

अगर रजिस्ट्रेशन न कराएँ तो शादी अवैध हो जाएगी?

नहीं। धारा 8(5) साफ़ कहती है कि किसी हिन्दू विवाह की वैधता प्रविष्टि न किए जाने से किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगी। जो खोता है वो वैधता नहीं, साबित करने की सुविधा है — और दिल्ली में जुर्माना भी लग सकता है।

दिल्ली में रजिस्ट्रेशन की समय सीमा क्या है?

दिल्ली (अनिवार्य विवाह पंजीकरण) आदेश 2014 के तहत आवेदन 60 दिन के भीतर देना है, अंतिम विवाह समारोह वाले दिन को छोड़कर। उसके बाद बढ़ी हुई अवधि में ₹500 अतिरिक्त लगता है, और फिर न कराने पर ₹1,000 जुर्माना, जिसे अपर ज़िला मजिस्ट्रेट उचित कारण दिखाने पर माफ़ कर सकते हैं।

हमारी शादी को पाँच साल हो गए, रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। अब क्या करें?

अब भी हो सकता है, और आपकी शादी पूरे समय वैध थी। देर से किया रजिस्ट्रेशन भी रजिस्ट्रेशन है। फ़ाइल में समारोह के सबूत चाहिए होंगे — मंदिर का रिकॉर्ड और एंट्री नंबर, फ़ोटो, पंडित जी के ब्यौरे, निमंत्रण, रसीदें और वो गवाह जो मौजूद थे। ये सब हर साल ढूँढना मुश्किल होता जाता है, इसलिए इस महीने कीजिए।

क्या सुप्रीम कोर्ट ने आर्य समाज के विवाह अवैध घोषित कर दिए हैं?

नहीं, यह ख़बर गलत तरीक़े से फैली है। असल फ़ैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट का है — श्रुति अग्निहोत्री बनाम आनंद कुमार श्रीवास्तव, 2024 SCC OnLine All 3701, 5 जुलाई 2024 — जिसमें कहा गया कि आर्य समाज संस्था और मैरिज रजिस्ट्रार, दोनों के प्रमाण पत्र अपने आप में वैध हिन्दू विवाह का प्रमाण नहीं हैं जब तक धारा 7 के संस्कार हुए और सिद्ध न हों। यह रजिस्ट्रार के सर्टिफ़िकेट पर भी उतना ही लागू होता है, और इसने वैध विवाहों को अवैध नहीं किया।

तो मंदिर के सर्टिफ़िकेट की कीमत क्या है?

वो इस बात का रिकॉर्ड है कि वहाँ समारोह हुआ — यानी असली सबूत, और सँभालने लायक। पर वो सरकारी दस्तावेज़ नहीं है और अकेले किसी पासपोर्ट ऑफ़िस, एम्बेसी, बैंक, बीमा कंपनी या कोर्ट में नहीं चलता। दोनों रखिए।

शादी के दिन सबसे ज़रूरी क्या सँभालना है?

पाँच चीज़ें: हवन और फेरों की चौड़ी फ़ोटो जिनमें अग्नि और पंडित जी दिखें; सप्तपदी की छोटी वीडियो क्लिप; पंडित जी का पूरा नाम, पता और फ़ोन नंबर; दोनों गवाहों के ब्यौरे और ID की कॉपी; और मंदिर के रजिस्टर की एंट्री का नंबर व तारीख़। यही वो सामान है जो जुलाई 2024 के फ़ैसले के बाद सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

रजिस्ट्रेशन में कितना खर्चा आता है?

सरकारी तरफ़ सब सैकड़ों में है: 2014 आदेश के तहत रजिस्ट्रेशन ₹200, राजस्व विभाग के एक पन्ने पर सोलेमनाइज़ेशन ₹150 और दूसरे पर हिन्दू मैरिज एक्ट ₹100। हलफ़नामों के लिए स्टाम्प पेपर और नोटरी की फ़ीस, और विदेश के लिए अपोस्टिल ₹50 प्रति दस्तावेज़। इससे ऊपर जो भी है वो किसी की सर्विस फ़ीस है और अलग लाइन में लिखी होनी चाहिए।

तत्काल में कितना लगता है?

2014 आदेश में प्राथमिकता यानी तत्काल रजिस्ट्रेशन के लिए ₹10,000 अतिरिक्त प्रकाशित है। यह सरकारी शुल्क है, किसी एजेंट की फ़ीस नहीं — और अगर फ़ाइल पूरी है तो आम तौर पर इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ती। अधूरी फ़ाइल पर तत्काल सिर्फ़ रिजेक्शन जल्दी दिलाता है।

कहाँ जाना होता है — कोर्ट में?

किसी कोर्ट में नहीं। रजिस्ट्रेशन SDM या रजिस्ट्रार ऑफ़ मैरिजेज़ के दफ़्तर होता है, जो राजस्व विभाग का अधिकारी है। तीस हज़ारी, साकेत, रोहिणी, कड़कड़डूमा और द्वारका कोर्ट कॉम्प्लेक्स में विवाह रजिस्टर रखे ही नहीं जाते।

दफ़्तर का समय क्या है?

राजस्व विभाग के पन्नों पर एक जगह सुबह 10 से दोपहर 1 बजे और दूसरी जगह सुबह 9:30 से 1 बजे लिखा है। यानी यह सुबह का काम है — दोपहर बाद जाने से आम तौर पर कुछ नहीं होता, और यही सबसे आम बर्बाद चक्कर है।

कौन सा दफ़्तर हमारे पते का है?

जाने से पहले फ़ोन करके पक्का कीजिए। 1 जनवरी 2026 से दिल्ली में 13 राजस्व ज़िले और 39 सब-डिवीज़न हैं — पुरानी दिल्ली, सेंट्रल नॉर्थ और आउटर नॉर्थ बने और शाहदरा ख़त्म हुआ। जो पता पहले एक दफ़्तर में जाता था, अब वहाँ न जाता हो।

क्या दोनों हलफ़नामे अलग-अलग चाहिए?

हाँ। दिल्ली में हर पक्ष का अलग हलफ़नामा चाहिए, एक साझा हलफ़नामा नहीं — और साझा वाला अक्सर वापस कर दिया जाता है। छोटे मूल्य के स्टाम्प पेपर पर, नोटरी के सामने।

गवाह कितने चाहिए और कौन हो सकते हैं?

हिन्दू मैरिज एक्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए दो गवाह, अपने असली पहचान और पते के प्रमाण के साथ। रिश्तेदार होना ज़रूरी नहीं — दोस्त, सहकर्मी या पड़ोसी चलेंगे। बेहतर हो कि वही हों जो समारोह में मौजूद थे, और एक अतिरिक्त गवाह तैयार रखिए।

क्या अलग जाति होने पर कोई दिक्कत है?

बिल्कुल नहीं। जाति किसी भी एक्ट की शर्त नहीं है, कोई जाति प्रमाण पत्र नहीं चाहिए और कोई इजाज़त नहीं लगती। आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट 1937 तो ख़ास तौर पर इसी सवाल को ख़त्म करने के लिए बना था।

एक ही गोत्र में शादी हो सकती है?

गोत्र हिन्दू मैरिज एक्ट में कहीं नहीं आता — न शर्तों में, न परिभाषाओं में, न आपत्ति के आधार के रूप में। एक्ट सपिण्ड सम्बन्ध और निषिद्ध सम्बन्धों को रोकता है, जो अलग चीज़ें हैं और जिन्हें अलग से जाँचना चाहिए।

उम्र को लेकर क्या नियम है?

लड़की की 18 और लड़के की 21 साल उम्र पूरी होनी चाहिए। इसमें कोई अपवाद, कोई छूट और कोई रिवाज़ नहीं चलता, और हर फ़ाइल में सबसे पहले यही जाँचा जाता है। लड़कियों की उम्र 21 करने वाला 2021 का विधेयक कभी पास नहीं हुआ और जून 2024 में लोकसभा भंग होने पर समाप्त हो गया।

सर्टिफ़िकेट खो जाए तो?

शादी पर कोई असर नहीं पड़ता — रजिस्टर दफ़्तर में है और वही असली रिकॉर्ड है। जिस दफ़्तर ने जारी किया था, वहाँ से प्रमाणित प्रति ली जा सकती है। जो चीज़ काम आसान बनाती है वो है रजिस्ट्रेशन नंबर और तारीख़ — इसलिए उसे सर्टिफ़िकेट के अलावा कहीं और भी लिख कर रखिए।

क्या आप पुरानी तारीख़ में सर्टिफ़िकेट बनवा सकते हैं?

नहीं, और कानूनी रूप से कोई नहीं बनवा सकता। झूठी तारीख़ वाला कागज़ बिना कागज़ के भी बुरा होता है — ठीक उसी वक़्त आपकी पूरी फ़ाइल की विश्वसनीयता ख़त्म कर देता है जब कोई उसे जाँच रहा होता है। हम ये साफ़ मना करते हैं।

वीज़ा या एम्बेसी के लिए चाहिए?देश और तारीख़ बताइए। कितनी कॉपी और अपोस्टिल — ये फ़ाइल लगाने से पहले तय होता है, बाद में नहीं।

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पिछले महीने आर्य समाज में शादी हुई है। सबसे ज़रूरी काम क्या है?

दो काम, आज ही। पहला — मंदिर से रजिस्टर एंट्री का नंबर और तारीख़ लिखवा लीजिए और पंडित जी का नाम-नंबर अलग से नोट कर लीजिए। दूसरा — दोनों आधार और सर्टिफ़िकेट पर नाम की स्पेलिंग मिला लीजिए। फिर 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन करा लीजिए।

मंदिर वालों ने कहा कि उनका सर्टिफ़िकेट ही काफ़ी है।

यह सलाह महँगी पड़ती है। उनका सर्टिफ़िकेट निजी रिकॉर्ड है। जिस दिन पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक, बीमा या पेंशन का काम पड़ेगा, सरकारी वाला माँगा जाएगा — और दिल्ली में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य भी है। रजिस्ट्रेशन कराने से मंदिर के विवाह से कुछ नहीं घटता।

2011 में शादी हुई थी, सिर्फ़ मंदिर का सर्टिफ़िकेट है और अब वीज़ा के लिए ज़रूरत है।

आपकी शादी वैध है, बस दर्ज नहीं है। अब जो चाहिए वो पहली बार का रजिस्ट्रेशन है, और उसके लिए समारोह के सबूत चाहिए — मंदिर का रिकॉर्ड और एंट्री नंबर, फ़ोटो, निमंत्रण, रसीदें और वो गवाह जो मौजूद थे। जो बचा है वो आज इकट्ठा कीजिए, क्योंकि हर साल यह मुश्किल होता जाता है।

ससुराल वालों के पास हमारा सर्टिफ़िकेट है और वो दे नहीं रहे।

उनसे बहस करने के बजाय दफ़्तर से प्रमाणित प्रति ले लीजिए। असली रिकॉर्ड रजिस्टर है, आपकी कॉपी सिर्फ़ कॉपी है — और जैसे ही आपके हाथ में नई प्रमाणित प्रति आ जाएगी, उनके पास रखे कागज़ की कोई ताक़त नहीं बचेगी। पहचान पत्र और अगर मिल जाए तो रजिस्ट्रेशन नंबर ले जाइए।

एक एजेंट ₹40,000 माँग रहा है और हिसाब नहीं बता रहा।

दो लाइनें माँगिए — सरकारी शुल्क कितना और उसकी फ़ीस कितनी। सरकारी तरफ़ 2014 आदेश के तहत ₹200 और हलफ़नामों का स्टाम्प-नोटरी है, बस। हिसाब अलग करने से इनकार इस पूरे धंधे की सबसे साफ़ चेतावनी है। और असली कागज़ उसे तब तक मत दीजिए जब तक लिखित कोटेशन न मिल जाए।

शादी को 4 महीने हो गए। क्या अब जुर्माना लगेगा?

60 दिन की अवधि निकल चुकी है, इसलिए बढ़ी हुई अवधि की फ़ीस या जुर्माना लग सकता है — प्रकाशित जुर्माना ₹1,000 है और ADM उचित कारण दिखाने पर माफ़ कर सकते हैं। नियम की जानकारी न होना बहुत आम है और साफ़-साफ़ बता देना ही ठीक रहता है। रुकिए मत, इसी महीने चले जाइए।

हमारे नाम की स्पेलिंग मंदिर के सर्टिफ़िकेट और आधार में अलग है।

फ़ाइल लगाने से पहले इसे मिलाइए, काउंटर पर नहीं। आम तौर पर एक हलफ़नामा चाहिए जो दोनों स्पेलिंग को जोड़े, उन दस्तावेज़ों के साथ जिन पर हर स्पेलिंग है। और अगर मंदिर आधार वाली स्पेलिंग से सर्टिफ़िकेट दोबारा दे सके तो वो सबसे साफ़ रास्ता है।

पति-पत्नी में से एक दूसरे धर्म का है। क्या आर्य समाज में शादी हो सकती है?

अगर दोनों हिन्दू, बौद्ध, जैन या सिख हैं तो हाँ। अगर एक पक्ष इनमें नहीं आता तो हिन्दू मैरिज एक्ट उस पर लागू नहीं होता, और सही रास्ता स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 है — जिसमें न धर्म चाहिए, न धर्म परिवर्तन, न कोई समारोह। नोटिस से बचने के लिए धर्म परिवर्तन हम किसी भी क़ीमत पर नहीं कराते।

क्या रजिस्ट्रेशन के लिए दोनों का जाना ज़रूरी है?

हाँ, दोनों पक्षों को असली दस्तावेज़ों के साथ ख़ुद जाना होता है, और गवाह भी अपने असली कागज़ों के साथ। यह वो हिस्सा है जो किसी एजेंट के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

सर्टिफ़िकेट मिलने में कितना समय लगता है?

राजस्व विभाग के एक पन्ने पर पूरी फ़ाइल पर 14 दिन और दूसरे पर 'सामान्यतः 15 दिन' लिखा है। इसे अपेक्षा मानिए, गारंटी नहीं, और अपने दफ़्तर से पक्का कर लीजिए। असल देरी आम तौर पर दफ़्तर की नहीं, नाम या तारीख़ की गड़बड़ी की होती है।

इस विषय पर सबसे आम गलती क्या देखते हैं?

यह मान लेना कि सर्टिफ़िकेट ही शादी है। हिन्दू मैरिज एक्ट वाले रास्ते में शादी सातवें फेरे पर होती है और सर्टिफ़िकेट सिर्फ़ उसका रिकॉर्ड है — इसलिए जब कभी सवाल उठता है, काम फ़ोटो, गवाह और पंडित जी आते हैं, न कि अकेला कागज़। और वही तीन चीज़ें लोग सबसे पहले खो देते हैं।

एक लाइन में सलाह दीजिए।

मंदिर के सर्टिफ़िकेट पर रजिस्टर एंट्री नंबर लिखवाइए, समारोह की फ़ोटो और गवाहों के नंबर सँभालिए, और 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन करा लीजिए। बाकी सब आसान है।

सार

  • आर्य समाज विवाह पूरी तरह वैध है — हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, और धारा 7 के अनुसार सप्तपदी के सातवें पग पर विवाह पूर्ण हो जाता है।
  • मंदिर का प्रमाण पत्र सरकारी दस्तावेज़ नहीं है। सँभालिए ज़रूर, पर रजिस्ट्रेशन भी कराइए।
  • रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अवैध नहीं होती — धारा 8(5)। पर साबित करना मुश्किल हो जाता है।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट, 5 जुलाई 2024: मंदिर और रजिस्ट्रार, दोनों का सर्टिफ़िकेट अकेला प्रमाण नहीं — धारा 7 के संस्कार सिद्ध होने चाहिए।
  • इसलिए समारोह के सबूत सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं — हवन और फेरों की फ़ोटो, सप्तपदी की क्लिप, पंडित जी के ब्यौरे, गवाहों के नंबर, रजिस्टर एंट्री नंबर, निमंत्रण और रसीदें।
  • दिल्ली में 60 दिन के अंदर आवेदन — ₹200 रजिस्ट्रेशन, देर से ₹500 अतिरिक्त, न कराने पर ₹1,000 जुर्माना जिसे ADM माफ़ कर सकते हैं।
  • तत्काल ₹10,000 अतिरिक्त — वैकल्पिक, और पूरी फ़ाइल पर आम तौर पर बेकार।
  • अलग-अलग हलफ़नामे, दो गवाह असली दस्तावेज़ों के साथ, और दोनों का ख़ुद जाना।
  • किसी कोर्ट में रजिस्ट्रेशन नहीं होता, और 1 जनवरी 2026 से दिल्ली में 13 ज़िले व 39 सब-डिवीज़न हैं — जाने से पहले फ़ोन कीजिए।
  • जाति और गोत्र कोई कानूनी रुकावट नहीं, और उम्र में कोई छूट नहीं — लड़की 18, लड़का 21।
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यह पन्ना विवाह कानून और प्रक्रिया की सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं, और इसे पढ़ने से कोई अधिवक्ता–मुवक्किल सम्बन्ध नहीं बनता। हम कोर्ट में पैरवी, प्रोटेक्शन पिटीशन या कोई मुक़दमेबाज़ी नहीं करते। सरकारी शुल्क, दफ़्तरी व्यवहार और ज़िलों की सीमाएँ बदलती रहती हैं — जो बात मायने रखती हो उसे सम्बन्धित दफ़्तर से पक्का कर लीजिए। देखें Disclaimer।

इस पन्ने के स्रोत: हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 — धारा 2 (लागू होने का दायरा, जिसमें बौद्ध, जैन और सिख स्पष्ट रूप से शामिल हैं), धारा 3 (सपिण्ड सम्बन्ध और निषिद्ध सम्बन्ध), धारा 5 (शर्तें, जिनमें पक्षों की आयु शामिल है), धारा 7 (संस्कार, और सप्तपदी के सातवें पग पर विवाह का पूर्ण और बाध्यकारी होना) तथा धारा 8 (पंजीकरण — उपधारा (2) में पच्चीस रुपये तक का जुर्माना, उपधारा (4) में रजिस्टर का साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य होना, और उपधारा (5) में यह कि प्रविष्टि न किए जाने से विवाह की वैधता किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगी); आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट 1937, जो आर्य समाजियों के बीच हुए विवाहों को जाति या पूर्व में माने गए धर्म के भेद के बावजूद वैध ठहराता है; श्रुति अग्निहोत्री बनाम आनंद कुमार श्रीवास्तव, 2024 SCC OnLine All 3701 (इलाहाबाद उच्च न्यायालय, 5 जुलाई 2024, न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला); दिल्ली (अनिवार्य विवाह पंजीकरण) आदेश, 2014 — जाति, पंथ या धर्म के भेद के बिना लागू होना, अंतिम समारोह वाले दिन को छोड़कर 60 दिन में आवेदन, ₹200 रजिस्ट्रेशन शुल्क, बढ़ी हुई अवधि में ₹500 अतिरिक्त, तत्काल के लिए ₹10,000 अतिरिक्त, और ₹1,000 जुर्माना जिसे अपर ज़िला मजिस्ट्रेट उचित कारण पर माफ़ कर सकते हैं; स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 — धाराएँ 4 से 8, 11, 13(2) और 14; बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006; दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961; दिल्ली राजस्व विभाग की प्रकाशित दस्तावेज़ सूची, शुल्क और काउंटर समय; और 1 जनवरी 2026 से दिल्ली का 13 राजस्व ज़िलों और 39 सब-डिवीज़नों में पुनर्गठन।
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