Updated 17 September 2026 · Arya Samaj Mandir Court Marriage Delhi NCR
कोर्ट मैरिज कैसे करें: दिल्ली में पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और खर्च
सबसे पहले वो बात जो हर दूसरे आदमी को गलत पता है — दिल्ली में किसी भी कोर्ट में शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं होता। “कोर्ट मैरिज” सिर्फ़ बोलचाल का शब्द है। इस पन्ने पर वो सब कुछ है जो दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग खुद बताता है — सर्टिफ़िकेट 14 दिन में, सोलेमनाइज़ेशन के लिए ₹150, काउंटर सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक — और वो बात जो सबसे काम की है: अगर आप दोनों हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध हैं, तो एक रास्ता ऐसा है जिसमें 30 दिन का नोटिस लगता ही नहीं।
Quick answer
दिल्ली में कोर्ट मैरिज कैसे होती है और कितना समय लगता है?
किसी कोर्ट में नहीं होती — “कोर्ट मैरिज” बोलचाल का शब्द है। कानून में इसका मतलब या तो स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत मैरिज ऑफ़िसर के सामने शादी है, या जो शादी हो चुकी है उसका SDM/ADM दफ़्तर में रजिस्ट्रेशन। दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के अनुसार फ़ाइल पूरी होने के बाद सर्टिफ़िकेट 14 दिन में मिलता है, सोलेमनाइज़ेशन के लिए ₹150 बताया गया है, और काउंटर का समय किसी भी कार्य दिवस पर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक है। अगर दोनों पक्ष हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध हैं तो हिंदू मैरिज एक्ट लागू होगा और उसमें 30 दिन का कोई नोटिस नहीं लगता; बाकी सब मामलों में स्पेशल मैरिज एक्ट लागू होगा, जिसमें 30 दिन का सार्वजनिक नोटिस लगता है और स्थायी पते पर उसकी कॉपी भेजी जाती है।
| कोर्ट में रजिस्ट्रेशन? | नहीं — SDM/ADM दफ़्तर में होता है |
|---|---|
| सर्टिफ़िकेट | फ़ाइल पूरी होने के बाद 14 दिन में |
| सोलेमनाइज़ेशन शुल्क | ₹150, जैसा राजस्व विभाग बताता है |
| काउंटर का समय | सुबह 10 से दोपहर 1 बजे, कार्य दिवसों पर |
| कहाँ आवेदन | अपने इलाके के ADM या डिप्टी कमिश्नर के दफ़्तर में |
| कौन सा एक्ट | दोनों हिंदू/सिख/जैन/बौद्ध → HMA 1955 · बाकी सब → SMA 1954 |
| बिना नोटिस वाला रास्ता | समारोह + HMA रजिस्ट्रेशन — कोई नोटिस नहीं, कोई आपत्ति अवधि नहीं |
| उम्र | दुल्हन 18+, दूल्हा 21+ — कोई अपवाद नहीं |
| माँ-बाप की इजाज़त | ज़रूरी नहीं · गवाह भी रिश्तेदार होना ज़रूरी नहीं |
| गोत्र | हिंदू मैरिज एक्ट में ज़िक्र तक नहीं — सपिंड और निषिद्ध डिग्री रोकी जाती है |
| शपथ पत्र | हर पक्ष का अलग — एक संयुक्त नहीं |
| कॉल या व्हाट्सएप | +91 7011476967 |
Last updated: 17 September 2026
हिंदी में इस विषय पर जो जानकारी मिलती है, उसका बड़ा हिस्सा एक-दूसरे से नकल किया हुआ है, और कई पन्ने आज भी उस ज़िला नक्शे की बात करते हैं जो 1 जनवरी 2026 को बदल चुका है। इसलिए इस पन्ने पर वही लिखा है जो दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग खुद प्रकाशित करता है — और जहाँ हम किसी बात की पुष्टि नहीं कर सके, वहाँ हमने ये कह दिया है, अंदाज़ा लगाकर खाली जगह नहीं भरी।
और एक बात शुरू में ही, क्योंकि इसी से सबसे ज़्यादा पैसा और वक़्त बचता है: अगर आप दोनों हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध हैं, तो आपके लिए एक ऐसा रास्ता मौजूद है जिसमें 30 दिन का कोई सार्वजनिक नोटिस नहीं लगता, कोई आपत्ति अवधि नहीं होती, और आपके स्थायी पते पर कुछ भी नहीं भेजा जाता। कई जोड़े इसके लिए मोटी रकम दे देते हैं, जबकि ये उनका कानूनी हक़ है।
1. “कोर्ट मैरिज” असल में क्या है
सबसे पहले वो बात, जो हर दूसरे आदमी को गलत पता है।
ये बात इसलिए ज़रूरी है क्योंकि कोर्ट के आसपास बैठे दफ़्तर इसी गलतफ़हमी पर चलते हैं। आपसे कहा जाएगा कि “कोर्ट मैरिज कोर्ट में ही होती है”, आपको वहाँ ले जाया जाएगा, और उस सफ़र का पैसा लिया जाएगा — जबकि उस इमारत में जाने की ज़रूरत ही नहीं थी।
| आपको क्या चाहिए | असल में कहाँ होता है |
|---|---|
| स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी | मैरिज ऑफ़िसर के सामने, उस ज़िले में जहाँ 30 दिन की रिहाइश की शर्त पूरी होती है |
| जो शादी हो चुकी है उसका रजिस्ट्रेशन | SDM / ADM दफ़्तर, जो आपके पते को कवर करता है |
| तलाक़, गुज़ारा भत्ता, बच्चे की कस्टडी | कोर्ट — और इसके लिए वकील चाहिए |
| विदेश के लिए अपोस्टिल | विदेश मंत्रालय, रजिस्ट्रेशन के बाद |
- फ़ाइल पूरी होने के बाद सर्टिफ़िकेट 14 दिन में जारी होता है।
- सोलेमनाइज़ेशन के लिए ₹150 बताया गया है। रजिस्ट्रेशन फ़ीस अलग और मामूली है।
- काउंटर का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक, किसी भी कार्य दिवस पर — आपके इलाके के ADM या संबंधित डिप्टी कमिश्नर के दफ़्तर में।
2. आप पर कौन सा कानून लागू होगा
ये आपकी मर्ज़ी नहीं है — ये इस बात से तय होता है कि आप दोनों कौन हैं। और यही तय करता है कि पूरी प्रक्रिया में 30 दिन का सार्वजनिक नोटिस लगेगा या नहीं।
| हिंदू मैरिज एक्ट 1955 | स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 | |
|---|---|---|
| किन पर लागू | दोनों पक्ष हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध | कोई भी — अलग-अलग धर्म भी, बिना धर्म बदले |
| सार्वजनिक नोटिस | बिल्कुल नहीं | 30 दिन, दफ़्तर में चस्पा |
| स्थायी पते पर कॉपी | नहीं | हाँ, अगर स्थायी पता कहीं और है |
| आपत्ति की अवधि | कोई नहीं | 30 दिन |
| रिहाइश की शर्त | इस तरह की कोई 30 दिन वाली शर्त नहीं | नोटिस से पहले 30 दिन की साबित होने वाली रिहाइश |
| कुल समय | समारोह उसी दिन; सर्टिफ़िकेट लगभग 14 दिन | नोटिस के बाद लगभग 45–60 दिन |
4. दस्तावेज़ — राजस्व विभाग की अपनी सूची
ये दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग की अपनी प्रकाशित सूची है। अगर कोई आपसे इससे बाहर की कोई चीज़ माँगे, तो पूछिए कि वो किस नियम के आधार पर माँग रहा है।
| दस्तावेज़ | ब्योरा | कहाँ गड़बड़ होती है |
|---|---|---|
| दोनों के दस्तख़त वाला आवेदन | फ़ॉर्म | सिर्फ़ एक का दस्तख़त। दोनों चाहिए। |
| पहचान प्रमाण | आधार, या वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पैन | दो दस्तावेज़ों में नाम की अलग-अलग स्पेलिंग — काउंटर पर नहीं, पहले ठीक कीजिए। |
| जन्मतिथि का दस्तावेज़ी सबूत, स्व-सत्यापित | जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं का सर्टिफ़िकेट, पासपोर्ट | सबसे ज़्यादा फ़ाइलें यहीं रुकती हैं। सिर्फ़ साल दिखाने वाला आधार अक्सर पूछताछ में आ जाता है। |
| रिहाइश का प्रमाण, स्व-सत्यापित | आपके अपने नाम पर | ज़मीन के कागज़, लाल डोरा सर्टिफ़िकेट या फ़र्म के दस्तावेज़ रिहाइश का प्रमाण नहीं हैं। |
| शादी का निमंत्रण कार्ड | अगर उपलब्ध हो | अनिवार्य नहीं — पर पुरानी शादी में बहुत काम आता है, तो ढूँढिए। |
| दोनों पक्षों के अलग-अलग शपथ पत्र | दो अलग, एक संयुक्त नहीं | यही सबसे आम बेकार का चक्कर है। |
| पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो | हर एक की दो-दो कॉपी | ज़्यादा लेकर जाइए। |
| सत्यापित समारोह की तस्वीरें | शादी के समारोह की तस्वीरें | केंद्र या राज्य सरकार के किसी अधिकारी से सत्यापित। |
| तलाक़ की डिक्री | अगर कोई पक्ष तलाक़शुदा है | असली। प्रमाणित प्रति उस अदालत से मिलने में समय लगता है — जल्दी शुरू कीजिए। |
| मृत्यु प्रमाण पत्र | विधवा या विधुर के लिए | असली। |
| पुरोहित का प्रमाण पत्र | धार्मिक शादी में | जिसने शादी कराई हो, उससे। |
| दूतावास के दस्तावेज़ | अगर कोई पक्ष विदेशी नागरिक है | हर मिशन का अलग समय लगता है — सबसे पहले यही शुरू कीजिए। |
5. पूरी प्रक्रिया, सही क्रम में
- तय कीजिए कि कौन सा एक्ट लागू है। दोनों हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध हैं तो हिंदू मैरिज एक्ट — कोई नोटिस नहीं। वरना स्पेशल मैरिज एक्ट — 30 दिन का नोटिस।
- उम्र जाँचिए, ईमानदारी से। दुल्हन 18+, दूल्हा 21+, शादी की तारीख़ को।
- अपने दस्तावेज़ अपने पास कीजिए। ये इस पूरे पन्ने की सबसे व्यावहारिक सलाह है। आधार, दसवीं का सर्टिफ़िकेट, पासपोर्ट — अगर ये किसी और की अलमारी में हैं, तो सबसे पहले यही निकालिए।
- नाम की स्पेलिंग और जन्मतिथि का सबूत ठीक कीजिए, आवेदन से पहले।
- अपने नाम पर रिहाइश का प्रमाण जुटाइए। आधार अपडेट आम तौर पर सबसे तेज़ कानूनी रास्ता है — और इसमें हफ़्ते लगते हैं, महीने नहीं।
- दफ़्तर की पुष्टि कीजिए। अपने प्रमाण पर छपे पते से चलिए, कॉलोनी के नाम से नहीं। और याद रखिए कि 1 जनवरी 2026 से दिल्ली के राजस्व ज़िले 11 से 13 और सब-डिवीज़न 22 से 39 हो गए हैं।
- दो शपथ पत्र बनवाइए — हर पक्ष का अलग, स्टाम्प पेपर पर, नोटरी से। दोनों को खुद जाना होगा।
- आवेदन कीजिए, ऑनलाइन e-District पोर्टल पर या काउंटर पर। आवेदन नंबर सँभालकर रखिए।
- अपॉइंटमेंट पर दोनों जाइए, गवाहों और सारे असली दस्तावेज़ों के साथ। “ऑनलाइन” का मतलब ये नहीं कि जाना नहीं पड़ेगा।
- सर्टिफ़िकेट लीजिए और उसी वक़्त अतिरिक्त कॉपियाँ माँगिए। बैंक, नौकरी, बीमा, पासपोर्ट — सबको एक-एक चाहिए हो सकती है।
6. आर्य समाज विवाह — और वो सवाल जो कोई नहीं पूछता
बहुत से जोड़े हमें फ़ोन करते हैं “आर्य समाज मैरिज” के लिए, जबकि उनकी शादी पहले ही हो चुकी होती है — घर में, पंडित जी के साथ, हवन और फेरों के साथ। उन्हें चाहिए सर्टिफ़िकेट, और कहीं से उन्हें बता दिया गया कि उसके लिए दोबारा मंदिर में शादी करनी पड़ेगी।
तो आर्य समाज मंदिर कब सही जवाब है?
- जब परिवार समारोह कराने से मना कर दे। दो बालिग लोग जो परिवार की मर्ज़ी के बिना शादी कर रहे हैं, उनके पास अक्सर न अग्नि जलाने वाला होता है, न गवाह। यहाँ मंदिर एक असली सेवा है, औपचारिकता नहीं।
- जब दोनों परिवारों के रीति-रिवाज अलग हों और कोई पीछे हटने को तैयार न हो — एक छोटा वैदिक समारोह अक्सर वो तटस्थ ज़मीन होता है जिसमें कोई हारता नहीं।
- जब शादी बिना दहेज और बिना दिखावे के चाहिए हो, और आप ये बात खुलकर कहना चाहते हों।
- जब आज या इसी हफ़्ते करना हो — एक से दो घंटे, दो गवाह, कोई इंतज़ाम नहीं।
- जब कोई सार्वजनिक नोटिस नहीं चाहिए — इस रास्ते में 30 दिन का नोटिस है ही नहीं।
7. पुरानी शादी का रजिस्ट्रेशन
हमारे पास आने वाली फ़ाइलों में एक बड़ा हिस्सा नई शादियों का है ही नहीं। ये 1990 या 2000 के दशक की शादियाँ हैं, जो कभी रजिस्टर नहीं हुईं — और अब बैंक, पेंशन दफ़्तर, ज़मीन का म्यूटेशन, स्कूल एडमिशन या वीज़ा की वजह से ज़रूरत पड़ गई है।
पुरानी फ़ाइल किन चीज़ों पर चलती है
- समारोह की तस्वीरें, चाहे कितनी भी धुँधली हों — अग्नि, फेरे, और आप दोनों उन लोगों के साथ जो आए थे।
- निमंत्रण कार्ड, अगर घर में किसी ने सँभालकर रखा हो। पुराने परिवारों में अक्सर किसी ने रखा होता है।
- वो गवाह जो सचमुच मौजूद था — भाई, चचेरा भाई, मोहल्ले का पड़ोसी। ये किसी भी दूसरे सबूत से ज़्यादा कीमती है।
- ऐसे दस्तावेज़ जिनमें आप दोनों का नाम है — राशन कार्ड, जॉइंट अकाउंट, बच्चों के स्कूल रिकॉर्ड, बीमा में नॉमिनेशन।
- आपके असली तथ्यों पर बने शपथ पत्र, जिनमें शादी की तारीख़, जगह और की गई रीतियाँ लिखी हों।
- शादी से पहले की जन्मतिथि का सबूत — जहाँ जन्म प्रमाण पत्र नहीं है वहाँ आम तौर पर दसवीं का सर्टिफ़िकेट ही ये काम करता है।
8. खर्च — और यहाँ लूटा कैसे जाता है
दो आँकड़े, हमेशा अलग-अलग। सरकारी शुल्क सरकार के पास जाता है, रसीद के साथ। सर्विस फ़ीस वो है जो कोई काम करने के बदले लेता है। जो एक ही मिला-जुला नंबर बताए, वो छुपा रहा है कि कौन सा हिस्सा किसका है।
| मद | अनुमानित | किसे |
|---|---|---|
| रजिस्ट्रेशन फ़ीस | मामूली वैधानिक शुल्क — दफ़्तर से पुष्टि कीजिए | सरकार |
| सोलेमनाइज़ेशन | ₹150, जैसा राजस्व विभाग बताता है | सरकार |
| पुरानी शादी पर लेट फ़ीस | अलग-अलग — दफ़्तर से पुष्टि कीजिए | सरकार |
| स्टाम्प पेपर और नोटरी, दो शपथ पत्र | कुछ सौ रुपये | विक्रेता / नोटरी |
| आर्य समाज विवाह, जहाँ ये रास्ता खुला हो | ₹3,100 से | सेवा |
| समारोह + रजिस्ट्रेशन एक साथ | ₹7,100 से | सेवा |
| कोर्ट मैरिज और रजिस्ट्रेशन सहायता | ₹6,100 से | सेवा |
| “30 दिन का नोटिस हटवाना” | नामुमकिन। इसका पैसा लेने वाला कुछ नहीं बेच रहा | — |
- क्या आप सरकारी फ़ीस और अपनी फ़ीस लिखकर, अलग-अलग दो लाइनों में देंगे? ईमानदार जवाब: हाँ।
- क्या 30 दिन का नोटिस हटाया जा सकता है? ईमानदार जवाब: नहीं।
- अगर हममें से किसी की उम्र कम है, तो आप क्या करेंगे? ईमानदार जवाब: फ़ाइल मना कर देंगे।
और वो बात जो लिखने में हमारा ही नुकसान है: अगर आप दोनों पात्र हैं, दस्तावेज़ आपस में मेल खाते हैं और आपके अपने हाथ में हैं, तो ये फ़ाइल आप खुद कर सकते हैं — सिर्फ़ सरकारी शुल्क और स्टाम्प पेपर के खर्च में। हम यही कहेंगे। सेवा की फ़ीस वहाँ बनती है जहाँ शादी पुरानी है और सबूत कम, नाम अलग-अलग लिखे हैं, उम्र का सबूत बनवाना है, या कोई तारीख़ टल नहीं सकती।
9. हम कहाँ रुक जाते हैं
तब क्या कीजिए, क्रम से
- ऐसा वकील कीजिए जो सुरक्षा याचिकाएँ दाखिल करता हो — सीधे पूछिए कि वो ये काम करते हैं या नहीं और कितनी बार किया है। सही जवाब ठोस होता है।
- अपने दस्तावेज़ साथ ले जाइए — पहचान, उम्र का सबूत, और अगर है तो मैरिज सर्टिफ़िकेट। ठीक से संपन्न और रजिस्टर्ड शादी अक्सर वो बुनियाद होती है जिस पर बाकी कानूनी कदम टिकते हैं।
- एक सादा रिकॉर्ड रखिए — तारीख़ें, क्या कहा गया, कौन मौजूद था। नाटक के लिए नहीं; इसलिए कि वकील सबसे पहले यही माँगेगा।
- किसी वेबसाइट पर भरोसा मत कीजिए — इस पन्ने पर भी नहीं। धमकी वाली स्थिति तथ्यों पर निर्भर और तत्काल होती है, और उसमें ऐसा इंसान चाहिए जो आपकी तरफ़ से काम कर सके।
10. वो गलतियाँ जो सबसे ज़्यादा होती हैं
ये असली पूछताछ से बने मिले-जुले उदाहरण हैं, किसी असली नाम वाले ग्राहक के नहीं।
दोपहर को दफ़्तर पहुँचना
दिल्ली · समय
हुआ क्या: एक जोड़े ने आधे दिन की छुट्टी ली, तीन बजे दफ़्तर पहुँचे, और काउंटर बंद मिला।
असल बात: राजस्व विभाग इस काम का समय सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक, कार्य दिवसों पर बताता है।
आपके लिए मतलब: सुबह जाइए, दोपहर को नहीं — और उसी हफ़्ते फ़ोन करके ये भी पक्का कीजिए कि आपके पते के लिए वही दफ़्तर सही है।
“ऑनलाइन” का सीधा मतलब निकाल लेना
दिल्ली · गलतफ़हमी
हुआ क्या: आवेदन ऑनलाइन कर दिया और दो महीने कुछ नहीं हुआ, क्योंकि किसी को पता ही नहीं था कि जाना भी पड़ेगा।
असल बात: आवेदन ऑनलाइन है; हाज़िरी वैकल्पिक नहीं। दोनों पक्ष गवाहों और असली दस्तावेज़ों के साथ जाते हैं, और उससे पहले फ़ाइल हिलती नहीं।
आपके लिए मतलब: ऑनलाइन फ़ाइल कीजिए, फिर अपॉइंटमेंट लेकर जाइए। जो बिना हाज़िरी के सर्टिफ़िकेट का वादा करे, वो ऐसी चीज़ बता रहा है जो होती ही नहीं।
एक संयुक्त शपथ पत्र
दिल्ली · वापस भेज दिया गया
हुआ क्या: इंटरनेट से एक जॉइंट एफ़िडेविट का टेम्पलेट लेकर, नोटरी करवाकर काउंटर पर गए — और लौटा दिए गए।
असल बात: राजस्व विभाग की सूची हर पक्ष से अलग-अलग शपथ पत्र माँगती है।
आपके लिए मतलब: दो दस्तावेज़, एक आपका और एक उनका। ये सबसे आम बेकार का चक्कर है और इसे ठीक करने में कुछ खर्च नहीं होता।
दस्तावेज़ किसी और की अलमारी में
दिल्ली · असली रुकावट
हुआ क्या: सब कुछ ठीक था, सिवाय इसके कि दुल्हन का दसवीं का सर्टिफ़िकेट और आधार दूसरे राज्य में माता-पिता के घर थे।
असल बात: उम्र का सबूत सबसे पहले जाँचा जाता है, और डुप्लिकेट सर्टिफ़िकेट बोर्ड से मँगवाने में समय लगता है।
आपके लिए मतलब: सबसे पहले अपने दस्तावेज़ अपने पास कीजिए। कानून से ज़्यादा जोड़े इसी पर अटकते हैं।
“गोत्र एक है, इसलिए शादी नहीं हो सकती”
दिल्ली NCR · सामाजिक एतराज़, कानूनी नहीं
हुआ क्या: परिवार ने गोत्र के आधार पर विरोध किया और जोड़े ने मान लिया कि कानूनी तौर पर बात खत्म है।
असल बात: हिंदू मैरिज एक्ट में गोत्र का ज़िक्र तक नहीं है। कानून सपिंड रिश्ते और निषिद्ध डिग्री को रोकता है, जो असली वंश की पीढ़ियों से नापे जाते हैं।
आपके लिए मतलब: गोत्र का एतराज़ आपको रोक नहीं सकता। हाँ, अगर परिवार सचमुच उन पीढ़ियों के भीतर मिलते हैं, तो वो एक अलग और असली सवाल है — शुरू में ही बता दीजिए।
जिन्हें हमारी ज़रूरत ही नहीं थी
दिल्ली · खुद कर लिया
हुआ क्या: दोनों पात्र, दोनों के दस्तावेज़ अपने पास, नाम एक जैसे, हाल में समारोह हो चुका, दो दोस्त गवाह बनने को तैयार, कोई डेडलाइन नहीं।
असल बात: फ़ाइल में कुछ भी ऐसा नहीं था जिसमें समझदारी लगानी पड़े।
आपके लिए मतलब: हमने उन्हें दस्तावेज़ों की सूची और दफ़्तर का समय भेजा और खुद जाकर करने को कहा। जो सेवा ये जवाब कभी नहीं देती, वो आपके साथ सीधी बात नहीं कर रही।
11. Frequently asked questions
20 questions we are asked most often, answered directly.
क्या कोर्ट मैरिज सच में कोर्ट में होती है?
नहीं। दिल्ली के किसी भी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में — तीस हज़ारी, रोहिणी, साकेत, द्वारका या कड़कड़डूमा — शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं होता, न वहाँ कोई मैरिज ऑफ़िसर काउंटर है। “कोर्ट मैरिज” बोलचाल का शब्द है। कानून में इसका मतलब स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत मैरिज ऑफ़िसर के सामने शादी, या हो चुकी शादी का SDM/ADM दफ़्तर में रजिस्ट्रेशन होता है।
दिल्ली में मैरिज सर्टिफ़िकेट कितने दिन में मिलता है?
दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के अनुसार फ़ाइल पूरी होने के बाद सर्टिफ़िकेट 14 दिन में जारी होता है। ध्यान दीजिए — ये 14 दिन तब से गिने जाते हैं जब फ़ाइल पूरी हो, आवेदन करने की तारीख़ से नहीं। जिस फ़ाइल में कोई दस्तावेज़ पूछा गया हो या अपॉइंटमेंट बाकी हो, उसकी घड़ी चल ही नहीं रही।
कुल खर्च कितना आता है?
सरकारी हिस्सा मामूली है — एक छोटी वैधानिक रजिस्ट्रेशन फ़ीस, सोलेमनाइज़ेशन के लिए राजस्व विभाग द्वारा बताया गया ₹150, और दो शपथ पत्रों के स्टाम्प पेपर व नोटरी के कुछ सौ रुपये। पुरानी शादी पर लेट फ़ीस भी लग सकती है। अगर कोई कहे कि सरकारी शुल्क हज़ारों या लाखों में है, तो उससे पूछिए कि वो कहाँ लिखा है।
आवेदन कहाँ करना है और किस समय?
अपने इलाके के ADM के दफ़्तर में, या संबंधित डिप्टी कमिश्नर के दफ़्तर में। राजस्व विभाग इस काम का समय किसी भी कार्य दिवस पर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बताता है। दोपहर को पहुँचना इस पूरी प्रक्रिया का सबसे आम बेकार का चक्कर है।
क्या हम उस ज़िले में आवेदन कर सकते हैं जहाँ हम नहीं रहते?
कभी-कभी हाँ, और ये बात बहुत कम लोग बताते हैं। राजस्व विभाग की स्थिति ये है कि आवेदन वहाँ किया जा सकता है जहाँ दोनों में से कोई एक रहता है, या जहाँ शादी संपन्न हुई थी। यानी तीन विकल्प हैं, एक नहीं — और अगर दोनों का रिहाइश प्रमाण कमज़ोर है पर शादी कहीं और हुई थी जहाँ सबूत मज़बूत है, तो वो तीसरा आधार काम आ सकता है।
कौन सा कानून हम पर लागू होगा?
अगर दोनों पक्ष हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हैं तो हिंदू विवाह अधिनियम 1955। बाकी सभी संयोजनों में विशेष विवाह अधिनियम 1954। ये आपकी पसंद नहीं है — आप दोनों कौन हैं, इससे तय होता है। और ये बहुत मायने रखता है, क्योंकि पहले रास्ते में कोई नोटिस अवधि है ही नहीं।
क्या 30 दिन का नोटिस हटवाया जा सकता है?
नहीं। ये अवधि विशेष विवाह अधिनियम 1954 में तय है और कोई सेवा, एजेंट या दफ़्तर इसे माफ़ नहीं कर सकता। जो ये कहे कि वो हटवा देगा, वो या तो चुपचाप दूसरे एक्ट के तहत फ़ाइल करेगा और आपको बताएगा नहीं, या करेगा ही कुछ नहीं। अगर आप दोनों हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे में आते हैं, तो बिना नोटिस वाला रास्ता वैसे भी आपका हक़ है।
क्या माँ-बाप की इजाज़त ज़रूरी है?
नहीं। जहाँ दुल्हन 18 या उससे ऊपर और दूल्हा 21 या उससे ऊपर है, वहाँ किसी भी एक्ट में माता-पिता की सहमति, मौजूदगी या दस्तख़त की ज़रूरत नहीं। किसी फ़ॉर्म में इसका कॉलम तक नहीं है। गवाह भी रिश्तेदार होना ज़रूरी नहीं — अपने असली दस्तावेज़ों के साथ दो दोस्त या पड़ोसी काफ़ी हैं।
क्या एक ही गोत्र में शादी गैरकानूनी है?
नहीं। हिंदू विवाह अधिनियम में गोत्र का ज़िक्र तक नहीं है। कानून सपिंड रिश्ते को रोकता है — जो असली वंश की पीढ़ियों से नापा जाता है, माँ की तरफ़ से तीन और पिता की तरफ़ से पाँच — और निषिद्ध डिग्री को, दोनों में रिवाज का अपवाद है। गोत्र का एतराज़ सामाजिक है, कानूनी नहीं, और वो न शादी रोक सकता है न उसे अवैध बना सकता है।
क्या पंचायत या खाप शादी रुकवा सकती है?
नहीं। किसी सामुदायिक संस्था का वैध विवाह पर कोई अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ (2018) में खाप पंचायतों के दख़ल और ऑनर-बेस्ड हिंसा के खिलाफ़ दिशानिर्देश दिए हैं, और लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2006) में माना कि बालिग व्यक्ति जिससे चाहे शादी कर सकता है।
दस्तावेज़ों में सबसे ज़्यादा दिक्कत किस चीज़ से आती है?
जन्मतिथि के सबूत से, और उसके बाद नाम की अलग-अलग स्पेलिंग से। राजस्व विभाग जन्मतिथि का दस्तावेज़ी सबूत माँगता है, और सिर्फ़ साल दिखाने वाला आधार अक्सर पूछताछ में आ जाता है। जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं का सर्टिफ़िकेट या पासपोर्ट इस्तेमाल कीजिए, और नाम की गड़बड़ी आवेदन से पहले ठीक कीजिए।
क्या एक संयुक्त शपथ पत्र चलेगा?
नहीं। राजस्व विभाग की सूची हर पक्ष से अलग-अलग शपथ पत्र माँगती है। इंटरनेट से डाउनलोड किया हुआ जॉइंट एफ़िडेविट लेकर जाना सबसे आम बेकार का चक्कर है, और इसे ठीक करने में कुछ खर्च नहीं होता।
कितने गवाह चाहिए और क्या वो रिश्तेदार होने चाहिए?
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए दो, और विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह संपन्न कराने के लिए तीन। हर गवाह को अपना असली पहचान और पता प्रमाण लाना होगा। गवाह का रिश्तेदार होना, एक ही धर्म का होना या एक ही इलाके का होना ज़रूरी नहीं। एक अतिरिक्त गवाह का इंतज़ाम रखिए।
हमारी शादी 2009 में हुई थी और कभी रजिस्टर नहीं हुई। क्या अब हो सकती है?
हाँ। जो शादी हो चुकी है उसके रजिस्ट्रेशन की कोई समय सीमा नहीं है, लेट फ़ीस लग सकती है, और उससे शादी की वैधता पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता। फ़ाइल सबूत पर चलती है — समारोह की तस्वीरें, निमंत्रण कार्ड अगर बचा हो, वो गवाह जो सचमुच मौजूद था, और ऐसे दस्तावेज़ जिनमें आप दोनों का नाम है।
क्या बैकडेटेड सर्टिफ़िकेट मिल सकता है?
नहीं, और जो दे रहा हो उसे मना कर दीजिए। सरकारी रिकॉर्ड में झूठी तारीख़ ठीक उसी वक़्त फेल होती है जब आप उस पर भरोसा कर रहे होते हैं — पेंशन के दावे में, बँटवारे में, या वीज़ा फ़ाइल में। वो हिफ़ाज़त नहीं, फँसाती है। असली शादी असली तारीख़ पर ईमानदारी से रजिस्टर हो सकती है।
हमने घर पर पंडित जी से शादी कर ली थी। क्या दोबारा मंदिर में करनी पड़ेगी?
आम तौर पर नहीं। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7 कहती है कि विवाह किसी भी एक पक्ष के रीति-रिवाजों से संपन्न हो सकता है, और जहाँ उनमें सप्तपदी शामिल है वहाँ सातवें कदम पर विवाह पूर्ण हो जाता है। इस धारा में मंदिर या संस्था का ज़िक्र नहीं है। अगर असली रीतियाँ हो चुकी हैं तो आप शादीशुदा हैं — आपको रजिस्ट्रेशन चाहिए, दूसरी शादी नहीं।
क्या हिंदू-सिख या हिंदू-जैन जोड़े को धर्म बदलना पड़ता है?
बिल्कुल नहीं। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2 साफ़ तौर पर हिंदुओं के साथ-साथ बौद्ध, जैन और सिख पर भी लागू होती है — और आर्य समाजियों का तो नाम लेकर ज़िक्र है। किसी शुद्धि की ज़रूरत नहीं। जो कोई ये कदम जोड़े, वो या तो गलत जानकारी दे रहा है या ऐसा काम बढ़ा रहा है जिसका वो पैसा ले सके।
“ऑनलाइन” का मतलब क्या हमें जाना नहीं पड़ेगा?
आवेदन ऑनलाइन है; हाज़िरी वैकल्पिक नहीं। दोनों पक्ष गवाहों और असली दस्तावेज़ों के साथ दफ़्तर जाते हैं, और उससे पहले फ़ाइल आगे नहीं बढ़ती। जो बिना किसी हाज़िरी के सर्टिफ़िकेट का वादा करे, वो ऐसी चीज़ बता रहा है जो होती ही नहीं।
क्या हमें किसी सेवा की ज़रूरत है?
अक्सर नहीं, और हम यही कहेंगे। अगर आप दोनों पात्र हैं, दस्तावेज़ आपस में मेल खाते हैं, दोनों के पास अपने नाम का रिहाइश प्रमाण है और शादी हाल की है या सबूत मज़बूत हैं, तो ये फ़ाइल आप खुद कर सकते हैं — सिर्फ़ सरकारी शुल्क और स्टाम्प पेपर के खर्च में। फ़ीस वहाँ बनती है जहाँ शादी पुरानी है और सबूत कम, नाम अलग-अलग लिखे हैं, या कोई तारीख़ टल नहीं सकती।
अगर धमकी मिल रही हो या पुलिस में शिकायत हो गई हो?
तो ये मुकदमेबाज़ी है, और इसके लिए उसी काम के लिए रखा गया वकील चाहिए — तुरंत। हम विवाह के दस्तावेज़ तैयार करते हैं, हम अदालत में पेश नहीं होते और सुरक्षा याचिका दाखिल नहीं करते। हम ये बात पहली कॉल पर कह देंगे, फ़ीस लेकर आपको अधर में छोड़ने के बजाय।
12. Real questions from couples
18 situations couples actually bring to us, with the answer we would give on the phone.
कोर्ट के बाहर बैठे आदमी ने कहा कि वो आज ही कोर्ट मैरिज करवा देगा।
कोर्ट में रजिस्ट्रेशन होता ही नहीं, तो वो जो बेच रहा है वो वैसा नहीं है जैसा बता रहा है। दो सवाल पूछिए: किस एक्ट के तहत, और कौन से दफ़्तर में? अगर जवाब गोलमोल हो, या ये कहा जाए कि 30 दिन का नोटिस हटाया जा सकता है, तो आपको उसका जवाब मिल गया।
हमें ₹45,000 बताया गया और कहा गया कि इसमें सरकारी फ़ीस शामिल है।
लिखकर दो लाइनों में माँगिए। सरकारी हिस्सा एक छोटी रजिस्ट्रेशन फ़ीस, सोलेमनाइज़ेशन का ₹150, और स्टाम्प पेपर व नोटरी के कुछ सौ रुपये है। बाकी जो बचा वो सर्विस फ़ीस है, और तय करने से पहले उसे अलग देखना आपका हक़ है।
मेरी पत्नी का आधार उसके माता-पिता के गाँव का पता दिखाता है।
तो इस काम के लिए उसकी साबित होने वाली रिहाइश वहीं है, चाहे वो सालों से दिल्ली में रह रही हो। तीन रास्ते हैं: आधार अपडेट करवाइए; आपकी रिहाइश के आधार पर आवेदन कीजिए; या अगर शादी कहीं और हुई थी जहाँ सबूत मज़बूत है, तो उस आधार पर। दोनों पते भेजिए, हम बताएँगे कौन सा साफ़ है।
हमारे पास सिर्फ़ आधार है जिसमें जन्म का साल दिखता है, तारीख़ नहीं।
यही सबसे आम वजह है जिससे फ़ाइल रुकती है। दसवीं का सर्टिफ़िकेट इस्तेमाल कीजिए — जहाँ जन्म प्रमाण पत्र नहीं है वहाँ आम तौर पर यही काम करता है — या पासपोर्ट। आवेदन से पहले ढूँढ लीजिए, क्योंकि पूछताछ आने पर 14 दिन की घड़ी रुक जाती है।
घर वाले कह रहे हैं कि बिना उनकी सहमति के शादी नहीं हो सकती।
उनकी सहमति कभी ज़रूरी थी ही नहीं। जहाँ दुल्हन 18+ और दूल्हा 21+ है, वहाँ कोई भी एक्ट माता-पिता की इजाज़त नहीं माँगता, किसी फ़ॉर्म में इसका कॉलम नहीं है, और कोई दफ़्तर उनसे नहीं पूछेगा। वो अपनी राय रखने के लिए आज़ाद हैं और न आने के लिए भी — इससे कुछ नहीं बदलता।
क्या समारोह पहले कर लें और रजिस्ट्रेशन बाद में?
हाँ, कर सकते हैं। रीति-रिवाजों से संपन्न शादी वैध है और रजिस्ट्रेशन की कोई समय सीमा नहीं। लेकिन टालिए मत — सर्टिफ़िकेट ही वो चीज़ है जो अस्पताल, बैंक, बीमा या नौकरी में शादी साबित करती है, और जिस जोड़े को परिवार का सहारा नहीं है उसे ये सबसे जल्दी चाहिए हो सकता है।
हमारी शादी 1996 की है और बहुत कम कागज़ बचे हैं।
फ़ॉर्म से नहीं, सबूत ढूँढने से शुरू कीजिए: धुँधली ही सही, समारोह की तस्वीरें; निमंत्रण कार्ड अगर घर में किसी ने रखा हो; वो भाई या चचेरा भाई जो सचमुच मौजूद था; और राशन कार्ड, जॉइंट अकाउंट, बच्चों के स्कूल रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज़ जिनमें दोनों का नाम है। शपथ पत्र इन्हीं असली चीज़ों पर बनेंगे।
दफ़्तर ने “सत्यापित समारोह की तस्वीरें” माँगी हैं। ये क्या होता है?
शादी के समारोह की तस्वीरें — अग्नि और रीतियाँ, रिसेप्शन नहीं — जो केंद्र या राज्य सरकार के किसी अधिकारी से सत्यापित हों, जैसा राजस्व विभाग की सूची में लिखा है। पुरानी शादी रजिस्टर करवा रहे हैं तो इसीलिए हम सबसे पहले शादी की तस्वीरें ढूँढने को कहते हैं।
क्या हम दोनों में से कोई एक अकेला जाकर काम करवा सकता है?
नहीं। दोनों पक्ष गवाहों और असली दस्तावेज़ों के साथ हाज़िर होते हैं — हाज़िरी का यही मतलब है। दिन दोनों के लिए और गवाहों के लिए तय कीजिए, और एक अतिरिक्त गवाह का इंतज़ाम रखिए।
पति विदेश में है। क्या अभी शुरू कर सकते हैं?
तैयारी पूरी कर सकते हैं — दस्तावेज़, शपथ पत्र, आवेदन — पर हाज़िरी में दोनों चाहिए, इसलिए अपॉइंटमेंट इंतज़ार करेगा। उसकी यात्रा की तारीख़ें बताइए, हम उलटा गिनकर फ़ाइल इस तरह तैयार रखेंगे कि उसके पहुँचते ही काम हो जाए।
सर्टिफ़िकेट खो गया है। क्या दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा?
नहीं — और ये एक अहम गलती है जिससे बचना चाहिए। रिकॉर्ड उसी दफ़्तर में मौजूद है जहाँ शादी रजिस्टर हुई थी, तो आपको डुप्लिकेट या प्रमाणित प्रति चाहिए। दोबारा ऐसे आवेदन करना जैसे शादी रजिस्टर ही न हुई हो, दूसरी एंट्री बना देता है — और वो कहीं बड़ी दिक्कत है।
सर्टिफ़िकेट में नाम की स्पेलिंग गलत छप गई है।
जिस दफ़्तर ने जारी किया है वहीं सुधार के लिए आवेदन कीजिए, और जितनी जल्दी हो सके। सर्टिफ़िकेट ही वो बुनियादी दस्तावेज़ है जिस पर आधार, पैन, बैंक और पासपोर्ट के बदलाव टिकते हैं — गलती वाले सर्टिफ़िकेट पर ये सब बनाना मतलब पूरा काम दोबारा करना।
हमें बैंक लोन के लिए तीन हफ़्ते में सर्टिफ़िकेट चाहिए।
तो ये पहली कॉल पर बताइए। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन में कोई नोटिस अवधि नहीं और प्रकाशित समय 14 दिन है — यानी अक्सर मुमकिन है। जो मुमकिन नहीं वो ये कि उम्र का सबूत बनवाना पड़े या नाम ठीक करना पड़े और फिर भी 14 दिन में हो जाए। दस्तावेज़ आज ही भेजिए।
क्या शादी के बाद नाम बदलना ज़रूरी है?
बिल्कुल नहीं। भारत में कोई कानून किसी भी पक्ष से शादी के बाद नाम बदलवाने की माँग नहीं करता। जो महिला अपना नाम रखती है वो कम शादीशुदा नहीं होती और उसका सर्टिफ़िकेट अधूरा नहीं होता। अगर बदलना चाहती हैं तो क्रम मायने रखता है — हमारे नाम बदलने वाले पन्ने पर पूरा क्रम दिया है।
अलग-अलग लोग अलग ज़िला बता रहे हैं।
दिल्ली में एक ही गली पर कई तरह के ज़िला नक्शे चलते हैं — राजस्व, पुलिस, अदालत — और वो आपस में मेल नहीं खाते। शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ़ <em>राजस्व</em> वाला मायने रखता है। और 1 जनवरी 2026 से ज़िले 11 से 13 हो गए हैं, इसलिए 2026 से पहले की किसी भी जानकारी पर शक कीजिए।
क्या दहेज का कोई हलफ़नामा देना पड़ता है?
राजस्व विभाग की सूची में दहेज, जाति या किसी और की सहमति के बारे में कोई दस्तावेज़ नहीं है। दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के तहत दहेज देना, लेना और माँगना तीनों अपराध हैं, और किसी भी समारोह में इसकी ज़रूरत नहीं। अगर कोई मसौदा आपको ऐसे खंडों के साथ थमाए, तो पूछिए कि वो वहाँ क्यों हैं।
कितनी कॉपियाँ लेनी चाहिए?
आपके सोचने से ज़्यादा, और काउंटर पर खड़े-खड़े ही माँग लीजिए। बैंक, नौकरी, बीमा, पासपोर्ट और शायद किसी विदेशी दूतावास — सबको एक-एक चाहिए हो सकती है, और अपोस्टिल हर दस्तावेज़ पर अलग से होता है। बाद में दोबारा आना धीमा और महँगा दोनों है।
सीधे बताइए, हमें आपकी ज़रूरत है या नहीं?
अपने प्रमाण पर छपा पता पढ़िए, दोनों के धर्म और उम्र बताइए, ये बताइए कि पहले किसी की शादी हुई थी या नहीं, समारोह कब हुआ था और उम्र का क्या सबूत है। पाँच मिनट में तय हो जाएगा कि कौन सा एक्ट लागू है, कौन सा दफ़्तर आपका है, और ये फ़ाइल आप खुद कर सकते हैं या नहीं।
संक्षेप में
- किसी कोर्ट में रजिस्ट्रेशन नहीं होता। ये SDM/ADM दफ़्तर का काम है।
- सर्टिफ़िकेट 14 दिन में — और ये 14 दिन तब से, जब फ़ाइल पूरी हो।
- सोलेमनाइज़ेशन ₹150, और रजिस्ट्रेशन फ़ीस अलग व मामूली। सरकारी हिस्सा सैकड़ों में है, हज़ारों में नहीं।
- काउंटर सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक। दोपहर को जाना सबसे आम बेकार का चक्कर है।
- आवेदन वहाँ भी हो सकता है जहाँ शादी हुई थी — सिर्फ़ रिहाइश ही आधार नहीं है।
- दोनों हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध हैं तो 30 दिन का नोटिस लगता ही नहीं, न कोई आपत्ति अवधि, न स्थायी पते पर कोई कॉपी।
- माता-पिता की इजाज़त ज़रूरी नहीं, गवाह रिश्तेदार होना ज़रूरी नहीं, और गोत्र कानूनी रुकावट नहीं है।
- उम्र पर कोई छूट नहीं — दुल्हन 18+, दूल्हा 21+। हम ऐसी फ़ाइल मना कर देते हैं।
- हर पक्ष का अलग शपथ पत्र, और जन्मतिथि का सबूत आवेदन से पहले ठीक कीजिए।
- पुरानी शादी कभी भी रजिस्टर हो सकती है — और बैकडेटेड सर्टिफ़िकेट कभी मत लीजिए।
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